
किन्नौर में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता, इको-टूरिज्म को मिलेगा नया बढ़ावा
IBEX NEWS BUREAU,शिमला 14 मई।
किन्नौर जिले की विश्व प्रसिद्ध सांगला घाटी से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। रकच्छम-चितकुल वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में एक मादा हिमालयन ब्राउन भालू अपने दो शावकों के साथ दिखाई दी है। यह दुर्लभ दृश्य वन विभाग की फील्ड टीम द्वारा सांगला तहसील क्षेत्र में देखा गया।
हिमालयन ब्राउन भालू को हिमालयी क्षेत्र की अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों में गिना जाता है। ऐसे में मादा भालू का अपने शावकों के साथ सुरक्षित दिखाई देना इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि सांगला घाटी का प्राकृतिक आवास और जैव विविधता अभी भी समृद्ध और संरक्षित है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दुर्लभ sightings से न केवल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलती है, बल्कि स्थानीय इको-टूरिज्म और प्रकृति आधारित पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। आने वाले समय में यह क्षेत्र वन्यजीव फोटोग्राफी और नेचर टूरिज्म के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।




इस उपलब्धि का श्रेय वाइल्डलाइफ सराहन डिवीजन की समर्पित फील्ड टीम को दिया जा रहा है। डीसीएफ अशोक नेगी के नेतृत्व में ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर, फॉरेस्ट गार्ड चयानंद, अक्षय, पवन कुमार तथा वन मित्र अल्पना नेगी ने कठिन परिस्थितियों में लगातार निगरानी और संरक्षण कार्यों को अंजाम दिया है।
वन विभाग ने इसे किन्नौर की जैव विविधता संरक्षण दिशा में सकारात्मक संकेत बताते हुए लोगों से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की है।



