
14 दिवसीय पावन दर्शन में 1.18 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, विश्व शांति और करुणा का बना संदेश
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
लद्दाख की पुण्यभूमि पर आयोजित भगवान तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों (Holy Relics) का 14 दिवसीय दिव्य महाप्रदर्शन आज श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। समापन अवसर पर हजारों श्रद्धालु चोगलमसर स्थित धर्मा सेंटर पहुंचे और भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों के अंतिम दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।



समापन समारोह में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह ऐतिहासिक आयोजन विश्व शांति और सार्वभौमिक सुख-समृद्धि को समर्पित लद्दाख के प्रसिद्ध “मोनलम चेनमो” महान प्रार्थना उत्सव के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान भिक्षुओं द्वारा पारंपरिक पवित्र ‘छम’ नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।


14 दिनों तक चले इस पवित्र महादर्शन में लद्दाख, देश और विदेश से आए 1 लाख 18 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के अवशेषों के दर्शन कर श्रद्धा अर्पित की। इसे लद्दाख के इतिहास के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का सार्वजनिक दर्शन 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर शुरू हुआ था। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लेह के जीवेत्सल में इसका विधिवत उद्घाटन किया था। श्री शाह ने स्वयं दो दिनों तक लद्दाख में रहकर इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लिया, जिसे भारत सरकार द्वारा लद्दाख की बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, शांति और मानवता का प्रतीक बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की दिव्य कृपा से लद्दाख आज विश्व के आध्यात्मिक मानचित्र पर नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा,
“भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष कल दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय लौट जाएंगे, लेकिन उनकी दिव्य आशीष सदैव लद्दाख की पवित्र धरती पर बनी रहेगी। आइए, हम सब मिलकर लद्दाख को विश्व स्तर पर शांति, ध्यान और आध्यात्मिक जागरण के केंद्र के रूप में स्थापित करें।”
उपराज्यपाल ने श्रद्धालुओं की अनुशासन, धैर्य और समर्पण भावना की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर श्रद्धालुओं ने जिस श्रद्धा और संयम का परिचय दिया, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है।
इस अवसर पर उन्होंने सभी पूज्य रिनपोछे, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन, ऑल लद्दाख गोंपा एसोसिएशन, यूटी प्रशासन, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, आईटीबीपी तथा लद्दाख पुलिस का भी विशेष आभार व्यक्त किया।
इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू, श्रीलंका और थाईलैंड के राजदूतों सहित अनेक सांसद, बौद्ध धर्मगुरु, विद्वान, शोधकर्ता और विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए।
29 अप्रैल को जब भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष लेह पहुंचे थे, तब हजारों लोग पारंपरिक परिधानों में सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर भावभीनी अगवानी करते दिखाई दिए। दूरदराज़ गांवों, सीमांत क्षेत्रों और मठों से भी श्रद्धालु लंबी यात्राएं तय कर दर्शन हेतु पहुंचे।
लेह के जीवेत्सल में नौ दिनों तक सार्वजनिक दर्शन के बाद पवित्र अवशेषों को 11 और 12 मई को जांस्कर के प्रसिद्ध करशा गोम्पा ले जाया गया, जहां विशेष प्रार्थनाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आध्यात्मिक प्रवचन आयोजित किए गए।
ड्रुकपा थुकसे रिनपोछे ने कहा कि लद्दाख के लोग अत्यंत सौभाग्यशाली हैं जिन्हें भगवान तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने इस भव्य आयोजन की सफलता के लिए भारत सरकार और सभी संबंधित संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।



