
चुनावी जीत सुनिश्चित करने की होड़ में अब लोग एक-दूसरे की छवि धूमिल करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। शिमला जिला के सुन्नी क्षेत्र में सामने आया कथित हमले का मामला भी जांच में इसी तरह की मनगढ़ंत कहानी साबित हुआ, जिसने चुनावी माहौल में सनसनी फैला दी।
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
चुनावी जीत सुनिश्चित करने की होड़ में अब लोग एक-दूसरे की छवि धूमिल करने के लिए झूठी कहानियां गढ़ने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। शिमला जिला के सुन्नी क्षेत्र में सामने आया कथित हमले का मामला भी जांच में इसी तरह की मनगढ़ंत कहानी साबित हुआ, जिसने चुनावी माहौल में सनसनी फैला दी।
मामला ग्राम पंचायत नालदेहरा का है, जहां प्रधान पद की प्रत्याशी भीमलता सुमना देवी पत्नी प्रेम कुमार निवासी गांव लिक्कर, डाकघर दुर्गापुर, तहसील व थाना सुन्नी ने 15 मई 2026 को थाना सुन्नी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया था कि वह प्रधान पद के लिए नामांकन वापस लेने जा रही थी और घर से करीब 100 मीटर दूर दो मुंह ढके व्यक्तियों ने पीछे से गर्दन और कंधे से पकड़कर धक्का दे दिया, जिससे वह बेहोश होकर गिर गई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत अभियोग संख्या 21/26 के तहत धारा 126(2) और 115(2) BNS में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जांच के दौरान पीड़िता ने दावा किया कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट कर उसे झाड़ियों में फेंक दिया था। लेकिन जब उसका मेडिकल CHC मशोबरा में करवाया गया तो रिपोर्ट में शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट नहीं पाई गई।
इसके बाद पुलिस टीम ने पीड़िता को साथ लेकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि मौके पर मौजूद घास, झाड़ियां और छोटे पौधे पूरी तरह सामान्य स्थिति में थे तथा वहां किसी संघर्ष या गिरने जैसे हालात के कोई निशान नहीं मिले।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस की गहन पूछताछ में शिकायतकर्ता ने अपना बयान बदल दिया। उसने स्वीकार किया कि उसे केवल भ्रम हुआ था कि किसी ने पीछे से पकड़ लिया है। महिला ने यह भी बताया कि उसे पहले भी “खेल” आने की समस्या रही है और संभवतः उसी कारण उसे ऐसा महसूस हुआ होगा।
पुलिस जांच के आधार पर मामला पूरी तरह तथ्यहीन और कल्पना पर आधारित पाया गया है।
इधर, शिमला पुलिस ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में किसी भी घटना को सनसनीखेज तरीके से पेश करने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि Representation of the People Act के तहत भ्रामक प्रचार और अफवाह फैलाने को लेकर सख्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।



