
IBEX NEWS BUREAU,शिमला/केलांग | 24 मई, 2026
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में पंचायत चुनाव की आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। जिला भाजपा के 71 पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पंचायत चुनाव से ठीक पहले इतने बड़े पैमाने पर इस्तीफा भाजपा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। 71 कार्यकर्ताओं के साथ उनके परिवारों का भी पार्टी से अलग होना आगामी विधानसभा चुनावों में भी भाजपा की राह मुश्किल कर सकता है।जब नेतृत्व ही पूर्व में पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहा हो, तो वे किस आधार पर समर्पित कार्यकर्ताओं को निष्कासित कर रहे हैं? हम इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर इस्तीफा दे रहे हैं।
कार्यकर्ताओं ने अपना साझा त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल को भेज दिया है। इस सामूहिक इस्तीफे के बाद जिले की राजनीति में भूचाल आ गया है, क्योंकि इस्तीफा देने वालों ने न केवल पार्टी छोड़ी है, बल्कि जिला अध्यक्ष पर गंभीर आरोप भी जड़े हैं।
इस्तीफा देने वाले गुट का मुख्य आक्रोश जिला अध्यक्ष रिगजिन हायरपा की कार्यप्रणाली को लेकर है। कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया है ।त्यागपत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान जिला अध्यक्ष ने स्वयं वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जबकि वे उस समय जिला उपाध्यक्ष थे। उस वक्त उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब जब संजीव कुमार (सिस्सू वार्ड) और टशी सोनम (कोलोंग वार्ड) निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बागियों का तर्क है कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।निष्ठावान कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन में वर्षों से खून-पसीना बहाने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर कांग्रेस से आए लोगों को पलकों पर बैठाया जा रहा है।लाहौल-स्पीति में ‘कमल’ के भीतर मची इस रार ने अब प्रदेश नेतृत्व की चिंता बढ़ेगी । अब देखना यह होगा कि शिमला से क्या डैमेज कंट्रोल की कोई कोशिश होती है या यह दरार भाजपा को सत्ता के गलियारों से दूर ले जाएगी।



