
सेवा विस्तार और नियमित नियुक्ति का विरोध, हाईकोर्ट में लंबित मामलों का दिया हवाला
IBEX NEWS BUREAU,शिमला, 24 मई।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Sanjay Gupta को सेवा विस्तार देकर नियमित मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया पर तीखा विरोध जताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों और न्यायालय में लंबित प्रकरणों के बावजूद ऐसे अधिकारी को प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठाना संस्थागत शुचिता और सुशासन के विपरीत है।
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव Sanjay Chauhan ने रविवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित CWP-PIL No. 44/2026 तिलक राज बनाम प्रदेश सरकार मामले में अदालत ने “Institutional Integrity” जैसे गंभीर मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि याचिका में अधिकारी के खिलाफ लंबित एफआईआर और आपराधिक संदर्भों का भी उल्लेख किया गया है।






सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव जैसे संवेदनशील पद पर केवल निष्पक्ष और बेदाग छवि वाले अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए, जबकि संजय गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है। पार्टी ने चेस्टर हिल भूमि प्रकरण, HPPTCL में करोड़ों रुपये की खरीद और ट्रांसमिशन लाइन आवंटन में कथित अनियमितताओं का भी हवाला दिया।



संजय चौहान ने कहा कि वर्ष 2009 में जांच एजेंसी द्वारा नकदी बरामदगी के मामले में संबंधित अधिकारी की गिरफ्तारी और निलंबन भी हुआ था, जिसका उल्लेख अब न्यायालयी कार्यवाही में सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे विवादों के बावजूद सेवा विस्तार और नियमित नियुक्ति की कोशिशें जनविश्वास को कमजोर करेंगी।
पार्टी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संजय गुप्ता को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने और सेवा विस्तार की प्रक्रिया तत्काल रद्द की जाए। साथ ही, उन्हें पद से हटाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग भी दोहराई गई है।



