
सियासत की नई पटकथा: सिरमौर में महिलाओं ने किया 86% मतदान, पंचायती राज में बढ़ा नारी शक्ति का दखल
IBEX NEWS BUREAU,शिमला | हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज चुनावों के नतीजों से पहले ही एक बड़ा फैसला आ चुका है—और वह फैसला है महिलाओं की जबरदस्त भागीदारी का। प्रदेश के लोकतंत्र में इस बार पुरुषों के मुकाबले ‘नारी शक्ति’ का पलड़ा भारी रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 12 में से 9 जिलों में महिला मतदाताओं ने वोट डालने के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने चुनावी चौपालों की तस्वीर बदल दी है। जिन प्रमुख जिलों में महिलाओं ने पुरुषों को पछाड़ा है, उनमें शामिल हैं:
सिरमौर में महिलाओं ने रिकॉर्ड 86% मतदान कर प्रदेश में मिसाल कायम की।कुल्लू व शिमला जिलों में भी महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी देखी गईं।मंडी और सोलन में भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर लोकतंत्र में अपनी आहुति दी।आयोग के अनुसार हमीरपुर, कांगड़ा, चम्बा, किन्नौर और ऊना जैसे जिलों में भी महिलाओं का वोटिंग ग्राफ पुरुषों की तुलना में अधिक या बराबर रहा है।)
हिमाचल की राजनीति में इसके मायने ये हैं कि प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की यह बढ़ती भागीदारी मात्र एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत है। पंचायतों में 50% आरक्षण के बाद अब महिलाएं केवल ‘वोटर’ नहीं बल्कि ‘मेकर’ बन गई हैं। भारी मतदान दर्शाता है कि महिलाएं अब अपने गांव की सरकार चुनने के लिए पूरी तरह जागरूक हैं।हिमाचल में महिलाएं पारंपरिक रूप से ‘साइलेंट वोटर’ मानी जाती थीं, लेकिन अब वे विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर मुखर होकर मतदान कर रही हैं।प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्य के पदों पर महिलाओं की दावेदारी और उन्हें मिलने वाला भारी समर्थन भविष्य में विधानसभा स्तर पर भी महिला नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करेगा।
• सर्वाधिक महिला मतदान: सिरमौर (86%)
• कुल प्रदेश स्तरीय मतदान: 81% (तीनों चरण मिलाकर)
सिरमौर जिले की भाटगढ़ पंचायत ने इस बार के चुनावों में केवल जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में जागरूकता की एक नई मिसाल पेश की है। यहाँ दर्ज किया गया 95% मतदान राज्य के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे बड़े आंकड़ों में से एक है। इस शानदार उपलब्धि के पीछे स्थानीय महिलाओं का अभूतपूर्व सहयोग और उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। भाटगढ़ की नारी शक्ति ने यह साबित कर दिया कि जब ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर घर की दहलीज लांघती हैं, तो वे न केवल वोटिंग प्रतिशत बढ़ाती हैं, बल्कि लोकतंत्र के आधार को भी मजबूत करती हैं। चुनाव के दिन सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं, जिसमें बुजुर्ग महिलाओं से लेकर पहली बार वोट देने वाली युवतियों तक में समान उत्साह था। भाटगढ़ का यह ‘सक्सेस मॉडल’ अब प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणा बन गया है, जो यह दर्शाता है कि सामुदायिक सहभागिता और महिला जागरूकता से किसी भी लोकतांत्रिक लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
सिरमौर में अंतिम चरण में 86.25 प्रतिशत मतदान दर्ज – जिला निर्वाचन अधिकारी
जिला सिरमौर में पंचायती राज संस्थाओं के अंतिम चरण के चुनाव में 89 ग्राम पंचायतों के 515 वार्डों के लिए आज हुए मतदान में कुल 86.25 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है, जिसमें 86.03 प्रतिशत पुरुष मतदाता तथा 86.50 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अंतिम चरण के चुनाव में आज 01 लाख, 16 हजार, 379 मतदाताओं में से 01 लाख, 381 मतदाताओं ने मतदान किया है।
उन्होंने बताया कि विकास खंड नाहन की 09 ग्राम पंचायतों में 86.66 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है तथा विकास खंड ददाहू की 08 पंचायतों में 87.47 प्रतिशत, विकास खंड कमरऊ स्थित तिलोरधार की 08 पंचायतों में 86.44 प्रतिशत, विकास खंड पच्छाद की 12 पंचायतों में 85.84 प्रतिशत, विकास खंड पांवटा साहिब की 16 पंचायतों में 86.49 प्रतिशत तथा विकास खंड राजगढ़ की 11 पंचायतों में 87.17 प्रतिशत, विकास खंड संगड़ाह की 13 पंचायतों की 84..21 प्रतिशत व विकास खंड शिलाई की 12 पंचायतों में 86.3 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है।



