चुनावी घमासान के बाद अब ब्लॉक स्तर पर ‘पावर गेम’ तेज; चौपाल, रामपुर, रोहड़ू से लेकर मशोबरा और टुटू तक पीठासीन अधिकारी नियुक्त, राजनेताओं की नजरें अब ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर
IBEX NEWS BUREAU,शिमला:
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज चुनावों के बाद अब ग्रामीण सियासत का असली ‘पावर सेंटर’ यानी ब्लॉक स्तर पर कब्जा जमाने की कशमकश चरम पर पहुंच गई है। चुनावी जंग के नतीजों के बाद अब नवनिर्वाचित सदस्यों की आधिकारिक ताजपोशी का समय आ गया है। इस राजनीतिक हलचल के बीच, उपायुक्त (डीसी) शिमला अनुपम कश्यप (IAS) ने एक बड़ा प्रशासनिक और रणनीतिक कदम उठाते हुए जिला शिमला की 13 पंचायत समितियों के नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए बकायदा पीठासीन अधिकारियों (Presiding Officers) की नियुक्ति के सरकारी आदेश जारी कर दिए हैं।इस आधिकारिक अधिसूचना के बाहर आते ही जिला शिमला की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल पर्दे के पीछे से अपनी-अपनी समर्थित पंचायत समितियों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने में लग गए हैं। चूंकि ब्लॉक समिति के चेयरमैन की कुर्सी सीधे तौर पर विधानसभा क्षेत्रों के राजनीतिक दबदबे को तय करती है, इसलिए स्थानीय विधायक और पार्टी क्षत्रप एक-एक सदस्य को अपने पाले में रखने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।अब देखना यह होगा कि 6 जून तक होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह के बाद, कौन सा राजनीतिक दल शिमला के इन ग्रामीण गढ़ों पर अपना परचम लहराने में कामयाब होता है और किसे इस ‘शह-मात’ के खेल में मात खानी पड़ती है।

6 जून से पहले शपथ: प्रशासनिक जल्दबाजी या राजनीतिक रणनीति?
डीसी शिमला द्वारा जारी इस कार्यालय आदेश के अनुसार, हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 79 और चुनाव नियमों के नियम 85 के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह नियुक्तियां की गई हैं। सबसे खास बात यह है कि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शपथ ग्रहण की यह पूरी प्रक्रिया 06 जून 2026 या उससे पहले हर हाल में पूरी करनी होगी। राजनीतिक गलियारों में इस तय समयसीमा (डेडलाइन) को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके तुरंत बाद ब्लॉक समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए जोड़-तोड़ और राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो जाएगी।
राजधानी शिमला और इसके ग्रामीण इलाकों की हर एक सीट राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एसडीएम और तहसीलदारों को मोर्चे पर उतारा है:
• चौपाल, कुमारसैन, रामपुर, रोहड़ू और Theog जैसी बड़ी पंचायत समितियों में संबंधित सब-डिवीजनल ऑफिसर (SDO-C) को ही पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। सुन्नी के SDO (C) को बसंतपुर पंचायत समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।ग्रामीण राजनीति के गढ़ माने जाने वाले मशोबरा और टुटू ब्लॉक के लिए क्रमशः तहसीलदार शिमला (ग्रामीण) और तहसीलदार शिमला (शहरी) को कमान सौंपी गई है।इसके अलावा जुब्बल, कोटखाई, कुपवी, ननखड़ी और छोहारा में भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को मुस्तैद किया गया है।
अध्यक्ष पद के लिए ‘शह और मात’ का खेल शुरू



