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टैगोर फैलो डॉ. ओम प्रकाश शर्मा ने शारदा, टांकरी व ब्राह्मी लिपियों के महत्व पर डाला प्रकाश, संरक्षण और डिजिटलीकरण पर दिया जोर
IBEX NEWS,शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में पांडुलिपियों और लिपियों की समृद्ध परंपरा पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात विद्वान एवं टैगोर फैलो (IIAS, शिमला) डॉ. ओम प्रकाश शर्मा ने “पश्चिमी हिमालय में लिपियाँ एवं पांडुलिपियाँ” विषय पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की शुरुआत स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण एवं तिलक के साथ मुख्य अतिथि के पारंपरिक स्वागत से हुई। इसके पश्चात डॉ. दीप लता ने उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। विभागाध्यक्ष डॉ. दीपाली धौल ने डॉ. शर्मा को पुष्पगुच्छ, शॉल एवं टोपी भेंट कर सम्मानित किया।

अपने व्याख्यान में डॉ. शर्मा ने पश्चिमी हिमालय में प्रचलित प्राचीन लिपियों—शारदा, टांकरी और ब्राह्मी—का विस्तृत परिचय देते हुए उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियाँ केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सामाजिक जीवन, प्रशासनिक व्यवस्था और लोकज्ञान का भी बहुमूल्य दस्तावेज निहित है।
उन्होंने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को हिमाचल प्रदेश में पांडुलिपियों और लिपियों पर गहन शोध करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल देते हुए चेताया कि समय रहते उचित कदम न उठाए गए तो यह अमूल्य ज्ञान-संपदा नष्ट हो सकती है।
कार्यक्रम के अंत में अतिथि संकाय डॉ. सरोज ने विभाग की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी, विद्यार्थी तथा प्राध्यापक—डॉ. दीपाली धौल, डॉ. दीप लता, डॉ. लता, डॉ. सोनिया और डॉ. सरोज—उपस्थित रहे।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय से जुड़े प्रश्न भी पूछे। यह व्याख्यान सभी के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।



