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3754 पंचायतों में होंगे इलेक्शन, लागू हो गई आचार संहिता; तीन चरण में होगा मतदान; जानें
हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव का आज एलान हो गया है। इसी के साथ पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लग गई है। पढ़ें पूरी खबर…
IBEX NEWS BUREAU शिमला, 28 अप्रैल 2026
राज्य निर्वाचन आयोग हिमाचल प्रदेश ने आज प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है, हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव का आज एलान हो गया। राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अनिल खाची ने शेड्यूल तय कर दिया। प्रदेश की 3,754 पंचायतों में चुनाव होंगे। आनी और नग्गर की 2 पंचायतों का कार्यकाल 2027 में पूरा होने के कारण यहां अभी चुनाव नहीं होंगे। आदर्श चुनाव आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। पंचायत चुनाव में 50 लाख 79 हजार मतदाता मतदान करेंगे। पंचायत चुनाव तीन चरण में होंगे। 29 अप्रैल को अधिसूचना होगी। 7, 8 व 11 मई को नामांकन प्रक्रिया होगी। 12 मई को नामांकन जांच होगी। नाम वापस लेने का समय 14 व 15 मई को रहेगा। 26 मई को पहले चरण का मतदान, 28 मई को दूसरे और 30 मई को तीसरे चरण का मतदान होगा। जिला उपायुक्त कार्यक्रम जारी करेंगे, जिसके आधार पर निश्चित होगा कि तीन चरणों में कहां-कहां कब-कब मतदान होगा। पंचायत और शहरी निकाय चुनाव पर 30 से 40 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है।भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243K और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 160 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने यह अधिसूचना जारी की है।
आचार संहिता लगने के बाद सरकार कोई भी नई घोषणा, नई भर्ती, नए टेंडर, ट्रांस, प्रमोशन, उद्घाटन-शिलान्यास इत्यादि नहीं कर पाएगी। प्रदेश की पंचायतों में करीब 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 85 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 50 हजार मतदाता भी शामिल हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

प्रदेश में 5079048 मतदाताओं की संख्या है। इसमें पुरुष मतदाता 25,67,770, महिला मतदाता 2511249। प्रदेश में कुल 21,678 मतदान केंद्र स्थापित होंगे। प्रदेश में सबसे ऊंचाई वाला मतदान केंद्र 4587 मीटर में स्थापित किया गया है। इस बार पांच अलग अलग बेल्ट पेपर में वोट डाल सकेंगे। इसमें प्रधान के लिए हलका हरा बेलेट पेपर, उपप्रधान के लिए पीला बेलेट पेपर, पंचायत सदस्य को सफेद, पंचायत समिति को गुलाबी, जिला परिषद सदस्य के लिए हलका नीला बेलेट पेपर होगा। वहीं, मतदान के दिन वेतन के साथ अवकाश मिलेगा। इसके साथ ही जिला परिषद और पंचायत समिति की मतगणना 31 मई को होगी। नगर निगम चुनाव की मतगणना भी 31 मई को ही होगी।
इस बार प्रदेश भर में कुल 31,182 पदों के लिए मतदान होगा। पदों का श्रेणीवार विवरण इस प्रकार है:

इन पंचायतों को मिली फिलहाल छूट
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिला कुल्लू की 4 ग्राम पंचायतों में फिलहाल प्रधान और उप-प्रधान के चुनाव नहीं होंगे क्योंकि उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। ये पंचायतें हैं:
• विकास खंड नगर: ग्राम पंचायत करजां और सोयल।
• विकास खंड आनी: ग्राम पंचायत जाबन और नम्होग।
नोट: हालांकि इन चार पंचायतों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए मतदान सुचारू रूप से संपन्न होगा।
आरक्षण की व्यवस्था
संविधान के अनुच्छेद 243D के प्रावधानों के अनुसार, जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के निर्देशानुसार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी पदों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सभी जिला प्रशासन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाने के आदेश दे रखे हैं, जिसके चलते चुनाव आयोग समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने में जुटा हुआ है। इससे पहले शहरी निकाय चुनाव की घोषणा बीते सप्ताह कर दी गई है। 51 निकायों में 17 मई और 2 जगह 22 मई को मतदान होना है।
सरकारी सेवाओं से हटाया गया व्यक्ति नहीं लड़ सकता चुनाव
पंचायतों में सरकारी सेवाओं से हटाया गया व्यक्ति चुनाव लड़ने का हकदार नहीं होगा। अगर कोई व्यक्ति शिकायत करता है, उक्त व्यक्ति का नामांकन रद्द माना जाएगा।
सरकारी नौकरी वाले नहीं बन सकते एजेंट
सरकारी नौकरी में सेवारत कोई कर्मचारी किसी उम्मीदवार का एजेंट बनता है तो उसे तीन साल का कारावास हो सकता है। सरकारी नौकरी में तैनात कर्मचारी या अधिकारी एजेंट नहीं बन सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से जिन्हें मानदेय मिलता है, वह पंचायतों के चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले नौकरी छोड़नी होगी।
शैक्षणिक योग्यता भी नहीं
पंचायतीराज संस्थाओं में चुनाव लड़ने की शैक्षणिक योग्यता नहीं होगी। अनपढ़ व्यक्ति भी चुनाव लड़ने का हकदार होगा।
आदर्श आचार संहिता क्या है?
आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है।
आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है।



