
यह घटना उन नीति-निर्धारकों के लिए एक संदेश भी है कि ग्रामीण आज भी अपने कर्तव्यों का पालन कठिन परिस्थितियों में कर रहे हैं, अब बारी प्रशासन की है कि इन दुर्गम क्षेत्रों तक सुविधाओं की राह आसान की जाए।
IBEX NEWS BUREAU,शिमला
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के दूसरे चरण के दौरान आज लोकतंत्र की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने दुर्गम क्षेत्रों की चुनौतियों और ग्रामीणों के अडिग जज्बे को एक साथ परिभाषित कर दिया। शिमला जिले के कुपवी विकास खंड के अंतर्गत आने वाली भालू पंचायत के सनत गाँव में ग्रामीणों ने न केवल मतदान किया, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि कोई भी मतदाता पीछे न छूटे।भालू पंचायत में मतदान शांतिपूर्ण रहा और ग्रामीणों की इस पहल की सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में खूब सराहना हो रही है।यह घटना उन नीति-निर्धारकों के लिए एक संदेश भी है कि ग्रामीण आज भी अपने कर्तव्यों का पालन कठिन परिस्थितियों में कर रहे हैं, अब बारी प्रशासन की है कि इन दुर्गम क्षेत्रों तक सुविधाओं की राह आसान की जाए।
सनत गाँव में जब एक बीमार और बुजुर्ग मतदाता के लिए मतदान केंद्र तक पहुँच पाना नामुमकिन लगा, तो गाँव के युवाओं और परिजनों ने हार नहीं मानी। सड़क सुविधा के अभाव और पथरीले रास्तों की परवाह किए बिना, ग्रामीणों ने मतदाता को पालकी (स्ट्रेचर) की तरह उठाकर ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए पोलिंग बूथ तक पहुँचाया।

चुनाव के इस दूसरे चरण में जहाँ आधुनिक सुविधाओं वाले क्षेत्रों में लोग घरों से निकलने में कतराते हैं, वहीं सनत गाँव के इस दृश्य ने साबित कर दिया कि आम जनमानस का लोकतांत्रिक प्रणाली पर विश्वास आज भी अटूट है। ग्रामीणों का कहना है कि “वोट हमारा अधिकार है और हम चाहते हैं कि हमारी पंचायत की कमान सही हाथों में हो, इसके लिए एक-एक वोट कीमती है।




